दिल्ली के एक बड़े और आलीशान मेंशन के अंदर, एक औरत लाल साड़ी में इधर-उधर घूम रही थी। उसकी आंखों में बेचैनी थी, शायद किसी का इंतजार कर रही थी।
तभी किसी की आवाज़ कानों में गूंज़ी, “शकुंतला जी, शान्त हो जाइए। आपका बेटा जल्दी ही आएगा, बस धैर्य बनाए रखिए।”
शकुंतला जी ने थोड़ी चिंतित आवाज़ में कहा, “रणवीर के पापा… आप तो रहने दीजिए। आपको अपने बेटे की चिंता नहीं है, पर मुझे है।”
वह अशोक रॉय कपूर, रणवीर के पिता थे। दरअसल आज उनका बड़ा बेटा, रणवीर, छह महीने की लंबी बिज़नेस ट्रिप के बाद लौट रहा था।
अशोक जी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे चिंता मत करो, वह आता ही होगा। तुमने महिर को भेजा है न? तो किस बात की चिंता?”
शकुंतला जी ने धीरे से कहा, “अगर आप कहें तो मैं शांत हो जाऊँगी।”
वह वहीं उनके पास बैठ गई, हाथ में चाय का प्याला थामे, लेकिन मन कहीं और ही था।
वहीं दूसरी ओर, दिल्ली की सड़कों पर एक कार पूरी रफ़्तार से दौड़ रही थी। धुएँ को पीछे छोड़ती हुई वह कार एक बारह मंज़िला इमारत के सामने आकर रुकी।
दरवाज़ा खुला और उसमें से एक बेहद आकर्षक और हैंडसम लड़का बाहर निकला। घुँघराले बाल, गले में गिटार का लॉकेट और हाथों पर बना त्रिशूल का टैटू। इस वक़्त उसने कैज़ुअल कपड़े पहन रखे थे, लेकिन उसका अंदाज़ भीड़ में भी अलग नज़र आ रहा था।
जैसे-जैसे वह आगे बढ़ा, हर कोई उसे विश करने लगा।
वह मुस्कुराते हुए सबकी तरफ़ हाथ हिलाकर कहता गया,
“थैंक यू… थैंक यू।”
यह था माहिर रॉय कपूर — कपूर ख़ानदान का सबसे छोटा बेटा और रणवीर का सबसे छोटा भाई। उससे पहले दो और भाई हैं…
लेकिन उनके बारे में बात बाद में।

माहिर एक दरवाज़े के सामने रुका और नॉक किया।
अंदर से एक भारी, गहरी और डॉमिनेंट आवाज़ आई,
“Come in.”
माहिर ने दरवाज़ा खोला।
सामने एक बड़ी-सी टेबल के पीछे एक बेहद हैंडसम इंसान बैठा था। व्हाइट शर्ट, ब्लैक पैंट, शर्ट की स्लीव्स कोहनियों तक मुड़ी हुईं, हाथों की नसें साफ़ नज़र आ रही थीं। आँखों पर बिना फ्रेम का चश्मा, जो उसे और भी एलीगेंट बना रहा था।
बाएँ हाथ में एक महंगी घड़ी थी — जिसे देखते ही उसकी हैसियत का अंदाज़ा हो जाता। बाल सलीके से स्टाइल किए हुए थे।
उसकी मौजूदगी में एक अलग ही दबदबा था।
कमरा जैसे अपने आप खामोश हो गया हो। यह था — रणवीर रॉय कपूर।

माहिर शरारती और मस्ती भरे अंदाज़ में बोला,
“भाई, ये क्या बात हुई? घर पर माँ आपका इंतज़ार कर रही हैं और आप यहाँ फाइलों में घुसे हुए हैं। That’s not fair.”
रणवीर ने सिर उठाकर उसे एक नज़र देखा।
नज़र इतनी ठंडी और सख़्त थी कि माहिर की हँसी वहीं रुक गई।
“अपना मुँह बंद रखो और चुपचाप मुझे काम करने दो,”
रणवीर ने गंभीर लहजे में कहा।
रणवीर की आवाज़ सुनते ही माहिर बिना कुछ कहे पास रखे सोफे पर जाकर बैठ गया।
कुछ पल बाद रणवीर ने फाइल बंद की, लैपटॉप साइड में रखा और कुर्सी से टिकते हुए बोला,
“अब बोलो… क्या काम है?”
माहिर ने हाथ उठाकर बेबसी दिखाते हुए कहा,
“भाई, आप दो घंटे से यहाँ हैं। मुझे एयरपोर्ट आने भी नहीं दिया आपने।
मॉम के दस मिस्ड कॉल आ चुके हैं। पूछ रही हैं आप कहाँ हैं,
और मैं कह रहा हूँ कि आप ट्रैफिक में फँसे हैं।
Please, अब तो चलिए।”
रणवीर ने बिना कुछ कहे हल्के से गर्दन हिलाई, उठा और सीधे बाहर की ओर चल दिया।
माहिर बस उसे जाता हुआ देखता रह गया।
फिर खुद से बुदबुदाया,
“खुद ही आना था तो मुझे क्यों भेजा यार…”
यह कहते हुए वह भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ा।



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