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Ek ladki ko dekha

वहीं दूसरी ओर, एक बस स्टैंड पर एक बस आकर धीरे से रुकी।

बस से एक लड़की उतरी। उसने लाल रंग की कुर्ती पहन रखी थी, नीचे सफेद प्लाज़ो, बाल खुले हुए थे। देखने में वह बेहद खूबसूरत थी, लेकिन उसकी आँखों में हल्की-सी चिंता और डर साफ़ झलक रहा था।

तभी उसका फोन बजा।

उसने तुरंत फोन उठाया।

दूसरी तरफ़ से घबराई हुई आवाज़ आई,

“मीरा, कहाँ है तू?”

उधर से मीरा ने जल्दी से कहा,

“मैं बस स्टैंड पर हूँ। फटाफट आ जाओ, मुझे लेने।” फोन कटते ही मीरा ने चारों तरफ़ नज़र दौड़ाई।

भीड़ थी, शोर था… लेकिन उसके दिल में अजीब-सी बेचैनी भी थी।

Meera

मीरा बस स्टैंड पर खड़ी अपने दोस्त का इंतज़ार कर रही थी। वह बार-बार सड़क की तरफ़ देख रही थी।

तभी अचानक उसके सामने से गाड़ियों का एक काफ़िला गुज़रा।

काली, चमकदार गाड़ियाँ… तेज़ रफ़्तार और अलग-सा रुतबा।

उन गाड़ियों में से एक के अंदर रणवीर और माहिर बैठे थे।

जैसे ही काफ़िला बस स्टैंड के पास से गुज़रा, माहिर की नज़र खिड़की से बाहर गई।

और उसी पल उसकी नज़र मीरा पर ठहर गई।

लाल कुर्ती, खुले बाल और आँखों में मासूमियत…

शायद वही मासूमियत थी, जिसने एक पल के लिए माहिर की नज़रों को उसकी ओर खींच लिया।

माहिर की गाड़ी आगे निकल चुकी थी।

वह कुछ पल तक खिड़की से बाहर ही देखता रह गया।

उसके मन में बस एक ही ख़याल आया—

कितनी प्यारी लड़की थी…

काश गाड़ी थोड़ी देर रुक जाती,

तो मैं उसे और देख पाता।

वह हल्की-सी मुस्कान के साथ खुद से ही सिर झटक देता है।

उधर बस स्टैंड पर मीरा का इंतज़ार खत्म होता है।

तभी एक कार आकर उसके सामने रुकती है।

“मीरा!”

राधिका की आवाज़ सुनते ही मीरा के चेहरे पर राहत आ जाती है।

मीरा जल्दी से कार में बैठ जाती है।

दोनों सहेलियाँ साथ बैठती हैं और गाड़ी आगे बढ़ जाती है।

कार अपनी रफ़्तार पकड़ लेती है…

गाड़ियों का काफ़िला एक खूबसूरत से मेंशन के बाहर आकर रुका।

बड़े से गेट के पास लगी नेम प्लेट पर सुनहरे अक्षरों में लिखा था—

“Kapoor Mansion.”

पीछे की गाड़ियों से बॉडीगार्ड तेज़ी से उतरे।

उन्होंने आगे बढ़कर रणवीर के लिए दरवाज़ा खोला।

रणवीर ने उतरते हुए अपना कोट ठीक किया और बिना इधर-उधर देखे आगे बढ़ गया।

माहिर भी उतरने ही वाला था कि तभी बॉडीगार्ड ने उसका दरवाज़ा बंद कर दिया।

यह देखकर माहिर ने कंधे उचकाए, थोड़ी-सी शक्ल बनाई और बॉडीगार्ड की तरफ़ देखते हुए बोला,

“अरे… मैं भी उतर रहा था।”

बॉडीगार्ड ने तुरंत दरवाज़ा खोल दिया और सिर झुकाकर बोला,

“सॉरी मास्टर, ध्यान नहीं दिया।”

माहिर ने हल्की-सी मुस्कान के साथ हाथ हिलाया,

“इट्स ओके… इट्स ओके।”

और फिर वह भी रणवीर के पीछे-पीछे मेंशन की ओर बढ़ गया।

रणवीर जैसे ही अंदर आया, उसकी नज़र सीधी अपनी माँ पर चली गई।

शकुंतला जी पिछले कितने ही घंटों से उसका इंतज़ार कर रही थीं।

रणवीर बिना कुछ कहे आगे बढ़ा, सबसे पहले उनके पैर छुए और फिर उन्हें गले लगा लिया। और बोला “I’m sorry, माँ… आपको तो पता है, ट्रैफिक में—”

उसकी बात पूरी होने से पहले ही शकुंतला जी ने उसका कान पकड़ लिया।

“ट्रैफिक में नहीं, मिस्टर!

ऑफिस में फँसे थे तुम। करा था फन मैंने वहाँ से… तुम्हारे एम्प्लॉयी ने बताया।

तुम दोनों भाई मिलकर मुझे बेवकूफ़ बना रहे हो।”

फिर उन्होंने तीखी नज़र से माहिर की तरफ़ देखा।

“एक कहता है ट्रैफिक में फँस गए,

और दूसरा फोन ही नहीं उठाता!”

माहिर ने तुरंत दोनों हाथ जोड़ दिए और मासूमियत से बोला,

“माफ़ कीजिए माता रानी,

ये सब तो आपके बड़े पुत्र की वजह से हुआ है।”

यह सुनकर रणवीर ने माहिर की तरफ़ एक सख़्त नज़र डाली,

और शकुंतला जी के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आ गई।

शकुंतला जी अभी उन दोनों भाइयों की क्लास लगा ही रही थीं कि तभी किसी के हँसने की आवाज़ आई।

सभी ने एक साथ ऊपर की तरफ़ देखा।

सीढ़ियों पर एक लड़की खड़ी थी।

उसने लॉन्ग ब्लैक बूट्स, स्कर्ट और टॉप पहन रखा था।

बाल हल्के ब्राउन और गोल्डन शेड में थे, जो उसकी पर्सनैलिटी को और उभार रहे थे।

माहिर ने उसे हँसते हुए देखा और झुंझलाकर बोला,

“अरे… कीर्ति की बच्ची,

अपने भाइयों पर हँसते हुए शर्म नहीं आती?”

कीर्ति अदा के साथ सीढ़ियाँ उतरती हुई बोली,

“मैं क्यों न हँसू?

जब आपकी हरकतें ही ऐसी हैं।”

कीर्ति थी विक्रम रॉय कपूर की बेटी—

रणवीर के पिता अशोक जी के सबसे छोटे भाई की संतान।

घर की लाड़ली…

लेकिन माहिर के साथ उसकी बिल्कुल नहीं बनती थी।

Kirti Roy Kapoor

माहिर ने आँखें तरेरते हुए कहा,

“ओए छिपकली, ज़्यादा मत बोल।

ये क्या काले कपड़े पहनकर घूम रही है?

मुझे तो समझ नहीं आता, मॉम और चाची जी तुझे ऐसे कपड़ों में बाहर कैसे जाने देती हैं।”

कीर्ति भी कहाँ चुप रहने वाली थी।

उसने उंगली दिखाते हुए जवाब दिया,

“ओए बंदर, ज़्यादा मत बोल।

इसे फ़ैशन कहते हैं, समझा?

और वैसे भी इंडिया की बेस्ट फ़ैशन डिज़ाइनर के सामने ज़्यादा मत बोला कर।”

फिर ताना मारते हुए बोली,

“तेरी तरह दिन भर गिटार हाथ में लेकर बस खड़ा नहीं रहती मैं।”

माहिर भड़क गया,

“कम से कम कुछ तो टैलेंट है मुझमें!”

धीरे-धीरे दोनों की बहस बढ़ती चली गई।

आवाज़ें ऊँची होने लगीं,

और बात यहाँ तक पहुँच गई कि दोनों एक-दूसरे के बाल पकड़ने ही वाले थे।

तभी रणवीर की भारी आवाज़ गूंजी—

“बस करो।

क्यों लड़ रहे हो? बहुत हो गया।”

रणवीर का कहना था और दोनों एकदम चुप हो गए।

कुछ पल की ख़ामोशी के बाद कीर्ति मुस्कुराते हुए रणवीर के पास गई और बोली,

“भाई, बहुत वक़्त हो गया।

चलो अब मुझे एक अच्छा-सा हग दो।”

रणवीर के चेहरे पर हल्की-सी नरमी आई।

उसने कीर्ति को गले लगा लिया।

फिर माहिर की तरफ़ देखते हुए सख़्त लेकिन अपनेपन भरे लहजे में बोला,

“और तुम… इससे ज़्यादा मत लड़ा करो।”

माहिर ने आँखें घुमाईं,

Bye everyone ab aapse mulakat hogi agale part mein

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