जहाँ पूरे कपूर मेंशन में हँसी-खुशी का माहौल था,
वहीं दूसरी ओर राधिका, मीरा को लेकर अपने घर पहुँच चुकी थी।
घर के अंदर कदम रखते ही मीरा ने घबराई हुई आवाज़ में पूछा,
“यार… मैं तो भागकर यहाँ आ गई हूँ,
लेकिन अगर किसी को पता चल गया तो बहुत बड़ी मुसीबत हो जाएगी।”
राधिका ने उसे समझाते हुए कहा “कुछ नहीं होगा। मैं हूँ न।
ये दिल्ली है, राजस्थान नहीं।”
फिर हल्की मुस्कान के साथ बोली,
“अभी के लिए तू यहीं रह।
और अपने लिए एक पार्ट-टाइम जॉब ढूँढ ले,
ताकि घर पर बोर भी न हो और थोड़ा मन भी लगा रहे।”
मीरा ने चुपचाप सिर हिलाया। शाम का वक़्त था।
कपूर मेंशन में सभी लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे थे।
तभी ऊपर से कैज़ुअल आउटफ़िट में रणवीर नीचे आया।
उसने अपनी कुर्सी खींचते हुए बैठते ही पूछा,
“वो दोनों कहाँ हैं?
अभी तक घर नहीं आए?”
कीर्ति ने जवाब दिया,
“नहीं भाईया,
अभी तक ध्रुव भैया और राज भैया नहीं आए हैं।”
रणवीर ने हल्की-सी नाराज़गी के साथ खुद से कहा,
“कहाँ हैं ये दोनों…
आने दो इन्हें।”
यह कहते हुए उसके हाथों की नसें तन गईं।
इस मामले में रणवीर बिल्कुल अपने दादाजी जैसा था।
दिग्विजय रॉय कपूर—
रणवीर के दादाजी, जो कई साल पहले इस दुनिया को छोड़ चुके थे।
उन्हें हमेशा पूरा परिवार साथ बैठकर खाना खाते देखना अच्छा लगता था।
अगर कभी बाहर होते या कोई बहुत ज़रूरी काम होता,
तभी वह खाने से छूट देते थे।
वरना उनके लिए परिवार का साथ बैठना सबसे ज़रूरी था।
वहीं दूसरी तरफ़,
एक हॉस्पिटल के मेन गेट से एक लड़का तेज़ी से बाहर दौड़ता हुआ निकला।
उसने झट से अपना सफ़ेद कोट उतारा
और अपनी स्पोर्ट्स बाइक पर बैठकर निकल पड़ा।
कुछ देर बाद वह बाइक एक मैदान के सामने आकर रुकी।
लड़का हड़बड़ाते हुए मैदान की ओर बढ़ा,
जहाँ पहले से ही भारी भीड़ जमा थी।
हर कोई किसी-न-किसी को चीयर कर रहा था।
सामने शायद कार रेस चल रही थी।
जैसे ही फ़्लैग नीचे हुआ,
दो कारें तेज़ी से आगे बढ़ीं—एक रेड स्पोर्ट्स कार,और दूसरी ब्लैक कार। दोनों ही दिखने में बेहद शानदार थीं।

रेस शुरू होते ही दोनों कारों के बीच ज़बरदस्त दौड़ लग गई।
कभी एक कार आगे निकलती,
तो कभी दूसरी पीछे छोड़ देती।
लेकिन एक बात साफ़ थी—भीड़ में हर तरफ़ सिर्फ़ राज का नाम गूँज रहा था। लड़कियाँ तो यहाँ तक कि उसके नाम के पोस्टर भी हवा में लहरा रही थीं।
तभी अचानक रेड कार ने ब्लैक कार को टक्कर मारने की कोशिश की।
ब्लैक कार का बैलेंस करीब दो मिनट के लिए बिगड़ गया और रेड कार आगे निकल गई।
यह देखते ही जो लोग अभी तक चीयर कर रहे थे,
वो सब एकदम खामोश हो गए।
अब सिर्फ़ कारों के टायरों के घिसने की तेज़ आवाज़ ही सुनाई दे रही थी।
ब्लैक कार के अंदर बैठे इंसान ने गुस्से में दाँत भींचते हुए कहा,
“How dare he…?
Now I will show him the real race.”
इतना कहते ही उसने कार की स्पीड और बढ़ा दी।
हर मोड़ पर वह इतनी स्मूद ड्राइव कर रहा था
कि देखने वाले दंग रह गए।
कुछ ही पलों में उसने खुद को रेड कार के बिल्कुल पास ला खड़ा किया।
रेड कार में बैठा यक्ष यह देखकर हैरान रह गया।
वह बुदबुदाया,
“How is it possible?
आख़िर ये यहाँ पहुँचा ही कैसे?”
और देखते ही देखते—ब्लैक कार रेड कार से आगे निकल गई।उसी पल पूरा मैदान गूंज उठा—“राज…! राज…! राज…!”

कार से बाहर निकलते ही राज का गुस्सा फूट पड़ा।
वह सीधा यक्ष के पास गया और बिना कुछ सोचे उसके मुँह पर एक ज़ोरदार मुक्का मार दिया।
“साले, जब चीटिंग ही करनी थी तो रेस लगाई ही क्यों?”
राज ने गुस्से में कहा।
इतना कहकर उसने एक और घूंसा उसके चेहरे पर जड़ दिया।
भीड़ में हलचल मच गई।
लगा जैसे अभी वहीं ज़बरदस्त लड़ाई शुरू हो जाएगी।
लेकिन तभी—
वही लड़का, जो थोड़ी देर पहले स्पोर्ट्स बाइक पर आया था,
तेज़ी से राज के पास पहुँचा और उसका हाथ पकड़कर बोला,
“बस कर… अभी।
फटाफट घर चल।
भैया आ गए हैं।”
यह सुनते ही राज का हाथ वहीं रुक गया।
उसकी साँसें तेज़ थीं,
आँखों में गुस्सा अभी भी था,
लेकिन कदम ठहर गए।
राज ने धीरे से उस लड़के की तरफ़ देखा।
वह लड़का बेहद खूबसूरत था।
बाल सलीके से सेट किए हुए,
इस वक़्त उसने ब्लू शर्ट और पैंट पहन रखी थी।
चेहरे के फीचर्स इतने आकर्षक थे कि भीड़ में भी वह अलग नज़र आ रहा था।
राज ने गहरी साँस ली,
मुट्ठियाँ ढीली कीं
और बिना कुछ कहे पीछे हट गया।

राज ध्रुव को लेकर बाइक की तरफ़ बढ़ा और बोला,
“डिनर का टाइम हो गया है।
और अगर हम अभी भैया के हाथ लग गए ना…
तो सीधे पिटेंगे।
फटाफट चल।”
यह सुनते ही राज झट से बोला,
“ना बाबा ना… मैं नहीं जा रहा।
बेकार में डाँट पड़ेगी।
ऐसा करते हैं, तू चला जा
और भैया को बोल देना कि मुझे चोट लग गई है,
एक्सीडेंट हो गया।”
राज की बात सुनते ही ध्रुव ने उसके सिर पर हल्की-सी चपत मार दी।
“और तुझे लगता है भैया मान जाएँगे?”
फिर ताना मारते हुए बोला,
“सीधे कहेंगे— चल, तेरा इलाज करवाते हैं।
वैसे भी सो जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी,
एक ही जगह काफ़ी होगी।”
राज ने मुँह बना लिया।
ध्रुव ने बाइक स्टार्ट करते हुए कहा,
“ज़्यादा दिमाग मत चला।
सीधा-सीधा अब घर चल।”
इतना कहते ही ध्रुव बाइक पर बैठ गया।
राज ने एक गहरी साँस ली
और चुपचाप उसके पीछे बैठ गया।
बाइक आगे बढ़ गई…



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