04

Bhaiyon Ki Masti

कुछ घंटों बाद बाइक आकर कपूर मेंशन के सामने रुकी।

ध्रुव ने बाइक रोकते हुए राज की तरफ़ देखा और कहा,

“अब तो स्मोकिंग बंद कर दे।”

दरअसल निकलते ही राज ने सिगरेट सुलगा ली थी।

जब भी उसे टेंशन होती, वह अक्सर स्मोक करता था।

दोनों बाइक से उतरे।

राज ने लापरवाही से कहा,

“क्या बंद कर दूँ?

भैया तो अब तक सो गए होंगे।

पीछे वाले गेट से अंदर घुस जाएँगे।

सुबह तक किसी को क्या पता चलेगा?”

फिर हँसते हुए बोला,

“माफ़ी माँग लेंगे,

थोड़ी-बहुत डाँट खा लेंगे।

पर अगर अभी सामने गए ना,

तो जूते-चप्पल पड़ेंगे।”

इतना कहकर उसने फिर से एक कश भर लिया।

तभी अंदर से माहिर बाहर आया और बोला,

“ब्रोज़… आप लोग यहाँ क्या कर रहे हो?

और राज भैया, स्मोकिंग बंद कीजिए।”

राज ने आँखें तरेरते हुए कहा,

“तू ऐसे बोल रहा है जैसे अभी अंदर से

भैया खलनायक की तरह निकलने वाले हों।”

माहिर ने गंभीर होकर कहा,

“वही तो कह रहा हूँ।

वो आ रहे हैं।

उन्हें पता चल गया है कि आप लोग आ गए हैं।”

यह सुनते ही राज ने सिगरेट ऐसे फेंकी

जैसे उसने ज़िंदगी में कभी सिगरेट देखी ही न हो।

फटाफट जेब से सेंटर फ्रेश निकाला

और चबाने लगा।

फिर अचानक सेंटर फ्रेश थूककर

सीधे ध्रुव के मुँह के क़रीब ले गया।

ध्रुव ने गर्दन पीछे की,

तो राज और पास आ गया।

वह फिर पीछे हटा,राज फिर आगे।

ध्रुव झुंझलाकर बोला,“क्या कर रहा है?”

राज ने चेहरा बनाकर कहा,

“स्मेल सूँघकर बता ना…

सिगरेट की बदबू तो नहीं आ रही?”

यह सुनकर माहिर ज़ोर से हँस पड़ा।

तभी पीछे से एक भारी आवाज़ आई,

“आख़िर यहाँ चल क्या रहा है?”

तीनों एक साथ पलटे।वहाँ रणवीर खड़ा था।

रणवीर को देखते ही राज एकदम सीधे खड़ा हो गया।

उधर माहिर था कि हँसते-हँसते रुक ही नहीं पा रहा था। उसकी हँसी लगातार निकल रही थी।

रणवीर दोनों के सामने आकर खड़ा हो गया।

राज ने मन ही मन दुआ की—

भैया कुछ भी पूछ लेना, बस ये मत पूछना कि कहाँ से आ रहे हो…

लेकिन किस्मत को शायद यही सवाल पसंद था।

रणवीर ने serious tone में पूछा,

“आख़िर तुम दोनों इतनी रात को आ कहाँ से रहे हो?”

राज ने मन ही मन कहा हाय रे मेरी फूटी किस्मत…

जिस सवाल का जवाब में देना नहीं चाहता भैया वही सवाल क्यों पूछते हैं।

ऊपर वाला भी आज साथ नहीं दे रहा।

इतना सोचकर उसने बेबसी में आसमान की तरफ़ देखना शुरू कर दिया,

जैसे वहाँ से कोई चमत्कार उतर आएगा।

तभी ध्रुव ने धीरे से उसकी कोहनी में मारते हुए फुसफुसाया,

“ज़्यादा मत देख…

भगवान भी इस शैतान से नहीं बचा सकते।”

माहिर की हँसी फिर तेज़ हो गई।

और रणवीर—अब भी जवाब का इंतज़ार कर रहा था।

रणवीर अब भी दोनों को उसी deadly silence के साथ घूर रहा था—

जिसमें इंसान खुद ही अपने सारे पाप याद कर ले।

रणवीर को अपने आप को घूरते हुए देखकर, राज ने जल्दी-से कहा,

“भैया… वो… actually हम लोग वॉक पर निकले थे।”

रणवीर ने अपनी भौहें ऊपर उठाते हुए कहा,

“वॉक पर?

Seriously?”

इतने में ध्रुव ने हाथ अपने माथे पर मार लिया,

जैसे कह रहा हो— अरे यार, फँस गए हम!

राज ने तसल्ली भरे अंदाज़ में अपनी ट्राउज़र की जेब में हाथ डालते हुए कहा,

“Well…

by the way, वॉक पैरों से होती है या bike से क्योंकि तुम लोग तो बाइक से आए हो न?

वो भी वॉक कर के।”

माहिर जोर से हँस पड़ा,

ध्रुव की नज़रें जमीन पर टिक गईं,

और रणवीर की आँखों में हल्की-सी मुस्कान उभर आई।

राजवीर अंदर जाते हुए बोला,

“चुपचाप अंदर आओ, खाना खाओ और सोने चले जाना।

और हाँ, next time मुझे भी अपने साथ वॉक पर ले जाना।

मैं भी तो देखूँ ज़रा… कैसी वॉक होती है।”

इतना कहकर वह अंदर चला गया।

माहिर भी उसके पीछे-पीछे जाने लगा, तभी राज ने उसका हाथ पकड़ लिया और दबे हुए गुस्से में बोला,

“बहुत हँसी आ रही है तुझे?”

माहिर कुछ कह पाता, उससे पहले ही राज ने कहा,

“आ जा, तुझे अभी हँसाता हूँ।”

इतना कहकर उसने माहिर की कमर पर हल्का-सा मुक्का मार दिया।

माहिर दर्द में नहीं, हँसी में झुक गया,

और ध्रुव सिर हिलाते हुए बुदबुदाया—

“ये दोनों कभी नहीं सुधरेंगे।”

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